Shekhawati University,Sikar

Saturday, 10 February 2018

Khatushyamji Mela 2018:खाटूश्यामजी फाल्गुनी मेला 2018

Khatushyamji Mela 2018:खाटूश्यामजी फाल्गुनी मेला 2018

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खाटूश्यामजी.खाटूश्यामजी का लक्खी मेला 17 फरवरी से शुरू हो रहा है। मेले में देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। भक्तों को दर्शन के लिए कहां से और कैसे गुजरना होगा, इसके लिए आज हम आपको बता रहे है मेले में दर्शनमार्ग की क्या रहेगी व्यवस्था के बारे में...

इस बार भक्तों को बाबा श्याम का दीदार करने के लिए 10 किमी तक का सफर तय करना होगा। इसके बाद ही बाबा श्याम के दर्शन हो सकेंगे।

Khatu Mela 2018 : आठ दशक में खाटू नगरी में बदल गई ये 8 चीजें, मेले का इतिहास भी है बेहद रोचक

Khatushyamji Mela 2018:खाटूश्यामजी फाल्गुनी मेला 2018

-सबसे पहले खाटूधाम आने वाले श्रद्धालुओं को तीन जीगजैग से होकर दस किमी तक का सफर तय होगा इसके बाद ही भक्तों को बाबा श्याम के दीदार होंगे। 

-जीगजैग एवं दर्शनमार्ग पर तकरीबन 10 हजार बल्ली, 10 हजार बांस और 5 हजार लोहे के पाइप एवं क्विंटलों की रस्सी लगेगी। इस काम को पूरा करने के लिए 150 से ज्यादा मजदूर काम पर लगे हुए है।

खाटूश्यामजी फाल्गुनी मेला 2018 : Khatushyamji Mela 2018


-इन दोनों मैदान में से गुजरने के बाद श्रद्धालुओं को श्री श्याम बगीची के पास बने मुख्य मेला मैदान के जिगजैग में आना होगा।
- इसके बाद मुख्य मंदिर परिसर में प्रवेश करने के बाद लखदातारी श्याम के दर्शन होंगे।

यह सभी व्यवस्थाएं जिला प्रशासन की देखरेख में श्री श्याम मंदिर कमेटी द्वारा की जा रही है। लामिया तिराहा के पास लखदातार मैदान एवं तिलकिया कृषि फार्म पर बांस बल्लियों एवं पाइप की सहायता से जिगजैग बनाने के लिए तकरीबन डेढ सौ से ज्यादा मजदूर दिन रात काम करने में लगे हुए है। मेले मं भीड़ के दबाव को देखते हुए जीगजैग व्यवस्था को काम में लिया जा सकता है ।

Monday, 5 February 2018

Khatushyamji Mela Fair 2018:खाटूश्यामजी फाल्गुनी मेला 2018

Khatushyam ji Mela Fair 2018:खाटूश्यामजी फाल्गुनी मेला 2018

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Khatushyam ji Mela Fair 2018:खाटूश्यामजी फाल्गुनी मेला 2018

खाटूश्यामजी.फाल्गुनी लक्खी मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को इस बार 5 से 6 घंटे में दस किमी का सफर तय करने के बाद बाबा श्याम के दीदार होंगे। मेले में खाटूधाम पहुंचे श्याम भक्तों को रींगस रोड पर बने सरकारी पार्किंग के सामने बने मुख्य प्रवेश द्वार से होकर बिजली ग्रिड के पास से होते हुए खटीकान मोहल्ला, केहरपुरा तिराहा से होकर लामिया तिराहे से लगी बल्लियों एवं पाइप की लाइन से होकर लखदातार मैदान में बने जिगजैग से गुजर कर रावण टीबे के पास तिलकिया कृषि फार्म में बने जिगजैग से होते हुए कुमावत कृषि फार्म के रास्ते से होते हुए श्री श्याम बगीची के पास बने मुख्य मेला मैदान के जिगजैग में आने के बाद मुख्य मंदिर परिसर में प्रवेश करने के बाद लखदातारी श्याम के दर्शन होंगे। उक्त सभी व्यवस्थाएं जिला प्रशासन की देखरेख में श्री श्याम मंदिर कमेटी की ओर से की जा रही है। मेले में भीड़ के दबाव को देखते हुए जिगजैग व्यवस्था को काम में लिया जा सकता है।

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Khatushyamji Mela Fair 2018:खाटूश्यामजी फाल्गुनी मेला 2018:150 मजदूर कर रहे हैं काम


दर्शन मार्ग में जीगजैग, रेलिंग सहित साफ सफाई व्यवस्था करने के लिए तकरीबन 150 मजदूर काम कर रहे हैं। यह मजदूर गत दस दिन पहले से ही काम में जुटे हैं।

Khatushyamji Mela Fair 2018:खाटूश्यामजी फाल्गुनी मेला 2018:लगेंगे एक दर्जन डोम


मेले के दौरान श्री श्याम मंदिर कमेटी की ओर से एक दर्जन के करीब डोम लगाए जाएंगे। जिनमें स्काउट्स, पुलिस, श्रद्धालुओं के विश्राम आदि के लिए व्यवस्था की जाएगी।

Khatushyamji Mela Fair 2018:खाटूश्यामजी फाल्गुनी मेला 2018:पांच बुकिंग, दो रिजर्वेशन काउंटर होंगे शुरू, ट्रेनों में बढ़ेंगे कोच


रींगस.बाबा श्याम के वार्षिक लक्खी मेले को लेकर रेलवे प्रशासन ने भी तैयारियां शुरू कर दी है। मेले की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए रविवार को डीसीएम हरफूल सिंह ने रींगस रेलवे स्टेशन का दौरा किया तथा स्टेशन की सुविधाओं में विस्तार के लिए दिशा निर्देश दिए। रेलवे स्टेशन पर नए प्लेटफार्म का निर्माण चल रहा है जिसके कारण यात्रियों को पीने के पानी के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। पानी की व्यवस्था के लिए आईओडब्ल्यू व निर्माण विभाग को निर्देशित किया गया। पांच बुकिंग काउंटर के साथ दो एटीवीएम व दो रिजर्वेशन काउंटर मेले पर यात्रियों को टिकट के लिए उपलब्ध रहेंगे। प्लेटफार्मो पर छाया व लाइट के लिए विशेष इंतजामात किए जा रहे हंै। डीसीएम ने ट्रेनों में बेटिकट यात्रियों की भी जांच की।

Khatushyamji Mela Fair 2018:खाटूश्यामजी फाल्गुनी मेला 2018:प्लेट फार्मो के बीच बनेगा विशेष मार्ग


ब्रोडगेज निर्माण के चलते प्लेटफार्म एक से दो व तीन पर जाने के लिए कोई सुविधा नहीं है जिससे मेले में यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ सकती है। डीसीएम ने बताया कि ठेकेदार को निर्माण पूरा करने के लिए कहा गया है। साथ ही यात्री सुविधा के लिए प्लेट फार्मो के बीच विशेष मार्ग तैयार करवाया जाएगा। प्लेटफार्म पर यात्री सुविधा काउंटर भी शुरू किए जाएंगे जहां पूछताछ व मेडिकल सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

How to reach Khatushyamji:ट्रेनों में बढेंगे कोच

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मेले के दौरान यात्री भार को देखते हुए सवारी गाडिय़ों में कोच की संख्या बढ़ाई जाएगी। 
उदयपुर, फुलेरा व अजमेर सें चलने वाली गाडिय़ो में 22 से 28 फरवरी तक अतिरिक्त कोच का संचालन होगा। रेलवे द्वारा मेला विशेष गाडिय़ों के संचालन पर भी विचार कर रहा है। यात्री सुरक्षा के लिए रींगस स्टेशन पर जीआरपी व आरपीएफ की 50 जवानों का अतिरिक्त जाप्ता भी लगाया जाएगा। डीसीएम हरफूल सिंह ने बताया कि मेले के दौरान यात्री सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा। मेले से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएगी।

Saturday, 25 February 2017

khatushyam falgun mela/fair 2017

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As holi 2017 is going to arrive khatushyam falgun mela/fair 2017,Shri Khatu shyam ji main Falgun mela/fair 2017 will be start from March 28, 2017 to March 09 ,2017. Khatu shyam ji falgun mela/fair 2017 is 10 Day Festival Time where millions of devotees take the holy view of khatu shyam baba .Khatu Shyam ji Mandir Committee announced that khatu shyam mela will be arranged from 28 feb to 9 march 2017 for the control of shyam bhakt rush
बाबा श्याम के वार्षिक लक्खी मेले के लिए राजस्थान रोडवेज ने योजना बना ली है। मेले के दौरान  निगम की ओर से इस बार 120 बसों का संचालन किया जाएगा। झुंझुनूं, खेतड़ी, कोटपूतली सीकर डिपो का भी सहयोग लिया जाएगा। मेले में पिछले साल की तुलना में 10 बस ज्यादा चलाए जाने की योजना है। प्लान तैयार होने के गाडिय़ों के प्रबंधन की व्यवस्था शुरू कर दी है। मेले के लिए राजस्थान के अन्य डिपो से 70 बसों की व्यवस्था की जा रही है। अगले सप्ताह तक डिपो को 20 नई बसें मिल जाएगी। 
इन डिपो पर रहेगी जिम्मेदारी: सीकर डिपो की ओर से मेले को दो चरण में चलाया जाएगा। पहला चरण दो से पांच मार्च तक चलेगा। दूसरा चरण सात से नौ मार्च तक चलेगा। पहले चरण में बस का संचालन सीकर डिपो की बसों से होगा। दूसरे चरण में खेतड़ी, कोटपूतली, झुंझुनूं व सीकर डिपो से बसों का संचालन किया जाएगा। मंढ़ा मोड व गणेशपुरा मोड पर लगाई जाएगी। जहां छह मार्च से चार-चार कर्मचारी तीन पारी में ड्यूटी देंगे।

DELHI TO KHATU SHYAMJI BUS SERVICE|BUS SERVICE TO KHATU SHYAM JI |

Baba Shyam lakhi annual fair is planned for the Rajasthan Roadways. During the fair, this time on behalf of the Corporation will be operating 120 buses. Jhunjhunu, Khetri, Kotputli Sikar depot also would be sought. Just last year, 10 more than at the fair is planned to run. Plan for management of the vehicle is started. 70 buses from other depots in Rajasthan for the fair is being arranged. Depot will get 20 new buses by next week. 

These depots will remain the responsibility: Sikar depot will be run in two stages from the fair. The first phase will last two to five by March. The second phase will run until March seven to nine. Sikar bus depot for buses in the first phase will run. In the second phase Khetri, Kotputli, Jhunjhunu and Sikar buses will be operating from the depot. Mndha mode and shall be levied on Ganeshpura mode. March six in three innings of the four employees will duty.

Reservation Counter in khatu shyam ji mela/fair 2017


Khatu fair Rajasthan Road Transport Corporation on behalf of the reserved seats at special arrangements for Turkey is being done. The march will begin five Khatushyam reservation counter in Dharamsala. Which will last until after Holi. By making the booking Volvo, AC and deluxe buses will be booking. All seats reserved for women only after booking a seat will be normal. The number of seats reserved for women at the time of the departure of the train passengers were empty seats will be allocated.  

Jaipur to khatu shyam ji bus service

दो मेला ग्राउंड बनाए गए हैं। पहला मेला ग्राउंड जयपुर सिंधी कैम्प व दूसरा मेला ग्राउंड खाटूश्यामजी में बनेगा। मुख्य प्रबंधक केएस मीणा ने बताया कि खाटूश्यामजी मेला ग्राउंड में निगम की ओर यात्रियों के पानी, बिजली की व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा जयपुर सिंधी कैम्प, दिल्ली के सराए काले खां व धौलाकुआं से कर्मचारियों की ड्यूटी रहेगी।
 The first Fair Grounds in Jaipur Sindhi Camp and the second will Khatushyam Fair Grounds. Chief Manager KS Meena Fair Grounds Khatushyam water services to the corporation, the system will power. Also Sindhi Camp Jaipur, Delhi and Dhaula Kuan from motel staff duty Kale Khan said. 

Sunday, 8 January 2017

Makar Sankranti 2017

Makar Sankranti 2017|Happy Makar Sankranti 2017 Greetings

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Makar Sankranti 

Happy Makar Sankranti 2017 Greetings

Makar Sankranti(Sanskrit: ) or Sankranti or Sankranthi marks the transition of the Sun into Capricorn on its celestial path. This is significant considering the Winter Solstice marks the beginning of the gradual increase of the duration of the day. Remember actually the shortest day on the earth is December 21st, 22nd and from this point onwards day begin to increase. Hence actual Winter Solstice begin on December 21st or December 22nd when the tropical sun enters Makara rashi. Now because of the earth's tilt of 23.45 degrees and sliding of equinoxes ayanamsa occurs and causing makara sankranti to slide further. 1000 years back in 1000AD makar sankranti was in Dec 31st and now January 14th and After 5000 years Makara sankranti will come in the end of february, beginning of march. After 9000 years Makara sankranti will come in the june (it will be the time when summer will be already there). Hence actual Uttarayana is December 21st when the tropical (Sayana) sun enters capricorn. This is because at one point of time they were the same. Because of this precession of the equinoxes ayanamsa occurs and hence sliding of makara sankranti. Traditionally, this has been one of many harvest days in India.

Makar Sankranti is one of the most auspicious days for the Hindus and is celebrated in almost all parts of India in myriad cultural forms, with great devotion. Millions of people take a dip in places like Ganga Sagar (point where the river Ganga meets the Bay of Bengal) and Prayag and pray to the Sun God (Surya). It is celebrated with pomp in southern parts of India as Pongal, and in Punjab as Lohri and Maghi. In the western Indian state of Gujarat, the celebrations are even bigger. People offer thousands of their colorful oblations to the Sun in the form of beautiful kites. The act stands as a metaphor for reaching to their beloved God, the one who represents the best. Makar Sankranthi also happens to be the day on which Bhishma, the grand sire of Pandavas andKauravas from the epic Mahabharata voluntarily left his mortal coil. In the rural and coastal areas, cock fights are held and is a prominent event of the festival. It is celebrated differently in different regions of India.
Makar Sankranti is celebrated as a very important festival in India. It’s a multifaceted festival and represents multiculturalism in today’s society where many different states and cultures celebrate the festival in their own way. It’s a festival for farmers as the harvesting is complete and they celebrate it. It’s a festival of celestial significance as the sun begins its northward journey and enters the sign of Makar (the Capricorn) from the Tropic of Cancer. And it’s a festival of new beginning.
Makar Sankranti greetings in hindi

Makar Sankranti is celebrated with utmost happiness and zest in every state of India. The playful nature of festival allows everyone to fly kites during day time, and therefore it is also known as the flying kite festival. Not only this, but the festival had many religious beliefs. This festival is cited in many religious manuscripts which enlighten us about the festival’s religious significance. Different regions and their cultural celebration of Makar Sankranti are as follows:

As per Hindu mythological Scriptures it is believed that on the auspicious day of Makar Sankranti, Lord Surya visits his son Lord Shani, who is also the representative of Capricorn. To celebrate the healthy relationship between a father and son, despite their differences, Makar Sankranti is considered significant. It is also believed that if a father visits his son on this particular day, their conflicts get resolved and positivity is shared with happiness and prosperity. Another legend who is associated with Makar Sankranti is Bhishma Pitamah, who was blessed with a special boon of choosing his death time. He was lying on the bed of arrows but he waited for the auspicious time of Uttarayan. So whoever dies during this period achieves salvation.

How to conduct the Makar Sankranti Puja.

Those who want to celebrate Makar Sankranti and conduct a holy puja at their home must consider the special Makar sankranti Puja vidhi. Please follow the below steps:
  • Before you start the Puja keep the Punya kaal muhurta and maha punya kaal muhurta in mind. And make sure all the images or idols are clean and properly placed in Puja altar. This Puja will be conducted to seek blessings of Lord Surya, so keep his idol or image at altar.
  • Take the plate to keep four black and four white Til Laddoos. Keep some money in the plate.
  • Among other ingredients are a mixture of rice flour and turmeric powder, betel nuts and leaves, holy water, flowers and incense sticks.
  • An offering to the deity consists of Ghevar (a sweet dish), four ladoos made of black tills and four made of white til along with some coins. Put all this in a plate.
  • Keep this plate of offering in front of the idol of Lord Surya. And start the Puja prayers.
  • During Puja processing ladies must cover their heads with Dupatta or Saree pallu.
  • Chant the Surya mantra for minimum 21 times or 108 times. Surya Mantra: 'Om Hram Hreem Hroum Sah Suryaya Namah'
Some devotees wear 12 mukhi Rudraksha during the Puja or they start wearing it after energizing Rudraksha in Puja. Among gemstone Ruby is worn on this day.
The Punya Kaal Muhurta is between 07:50 hrs to 18:17 hrs (IST)
Total Duration of 10 Hours 26 mins.
The
Sankranti Moment will begin at 07:50 hrs.
The Maha Punya Kaal Muhurta will be between 07:50 hrs to 08:14 hrs.
Total Duration of just 24 mins. 

Benefits of Conducting Puja on Makar Sankranti:

  • The Consciousness or Cosmic intelligence increases to many levels, so by conducting Puja you can derive benefits of higher consciousness.
  • The Spiritual emotion enhances the body and purifies it.
  • The offerings done during this period yields successful results.
  • It’s a holy time to spread Spirituality and Dharma in society.

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Sunday, 13 November 2016

Guru Nanak Dev Ji Birth Anniversary

Guru Nanak Dev Ji, the first Sikh guru , was born in 1469 in Talwandi. His father was Mehta Kalu and his mother was Mata Tripta. His older sister was Bibi Nanaki. From birth, Guru Ji was seen as a special figure and was God himself in a human form. As the founder of a new religion, Guru Nanak set down strong foundations for his successors and his followers. 
Gurpurab of Guru Nanak Dev Ji or Guru Nanak Jayanti

One of the most important beliefs of Sikhism that Guru Nanak Dev Ji set down is that it's necessary to help the needy and the poor. Guru Ji was always ready to help the poor and he served food to them. In fact, Guru Ji often invited the needy and the poor into his house. Another example of Guru Ji helping the poor and the needy occurred while he was a storekeeper. Guru Nanak Dev Ji used to spend a large part of his wages in order to feed the poor and the hungry.
Guru Nanak Dev Ji also taught us that there is one God and he is the Truth and Ultimate Reality. To emphasize this point, Guru Ji said, "There is neither Hindu nor Muslim." In God's eyes, the labels of Hindu, Muslim, Jew, Christian, etc. don't mean anything. Guru Ji also taught that God has created the universe and he is everywhere. In order to spread these messages, Guru Nanak Dev Ji took four long journeys. On these journeys, Guru Ji got many followers and was able to relate his message to many people.
Guru Nanak Dev Ji taught us that all human beings regardless of skin color, wealth, caste, and gender are created equal. When Guru Ji left this world at the age of 70, in 1539, he had laid down the foundations for a great religion.

Gurpurab of Guru Nanak Dev Ji or Guru Nanak Jayanti

Guru Nanak Dev Ji is the founder of Sikhism and so his birthday is of special importance to every Sikh. Usually his birthday known as Guru Nanak Jayanti falls in November but as per the lunar Indian Calendar, every year his birthday date keeps on changing. To start with the celebrations, Prabhat Pheris are held many days before the birthday date of Guru Sahib. Prabhat means morning and Pheris, which is derived from Pheras means rounds. In Prabhat Pheris Sikhs gathers at one place early morning at Gurdwara and start singing hymns. The whole procession then moves towards the home that has invited them for religious mean. After the complete pheri, Prasad is distributed among the Sangat. Guru Nanak Dev Ji’s birthday celebrations last for three days and instigate with Akhand Path. On the second day, a procession led by Panj Piare is organized that passes through main roads and streets. The Palki (Palanquin) of Guru Granth Sahib is the main attraction that is decorated with flowers. Passersby pay obeisance to Guru Granth Sahib. Devotees also chant hymns and Sikhs play “Gatka” a kind of Sikh martial art in the procession. On the third day, i.e. on the birthday-date, Asa-di-Var (morning hymns) is recited at 4-5 AM. Then the hymns from Guru Granth Sahib are read which are followed by Katha, recitation of poems and lectures on the life of Guru Nanak Dev Ji. The whole celebrations are performed till 2:00 pm which is followed by Ardas and Guru ka Langar. 

At some Gurdwaras, even the night prayers are done in which path of Rehras Sahib is recited followed by late night kirtan.

Thursday, 10 November 2016

Dev Uthani Ekadashi Vrat Katha In Hindi/English

About  Dev Uthani(Prabodhini) Ekadashi Vrat


Dev Uthani Ekadashi Vrat is one of the most important and sacred Ekadashis in Hinduism. It is also known as Prabodhini Ekadashi .Prabodhini Ekadashi Vrat  or Dev Uthani Ekadashi Vrat is observed on the eleventh day during the Shukla Paksha or waxing phase of moon in Kartik Month as per traditional Hindu Lunar Calendar.  
Dev Uthani Ekadashi Vrat

On Utthana Ekadasi Vrat day, an image of Lord Vishnu is drawn on the ground. Lamps are lit around it and fruits and vegetables are offered to this fresh image.In some regions the image is covered with a big brass plate symbolizing that He is sleeping. Bhajans dedicated to Lord Vishnu is sung and he is asked to shed his sleep and wake up and bless people.To wake the Lord, children light mustard torches at night and make lot of noise.

On Dev Prabodhini Ekadashi Vrat day some people observe strict fasting and do not even drink water.In most other regions all the usual rituals associated with Ekadasi fasting are followed.Those observing partial fasting eat fruits and avoid grains and rice.
10 और 11 नवंबर 2016 को देवउठनी एकादशी का पर्व है। इस दिन जगत के पालनकर्ता भगवान श्री विष्णु अपनी शयन निद्रा से जाग्रत होंगे और सृष्टि का कार्यभार पुन: संभालेंगे । इसी तरह भगवान आशुतोष शिव पुन: कैलाश की यात्रा पर निकल पड़ेंगे। आइए जानें कैसे करें व्रत-पूजन :-  
* देवउठनी एकादशी के दिन व्रत करने वाली महिलाएं प्रातःकाल में स्नानादि से निवृत्त होकर आंगन में चौक बनाएं।
 
* पश्चात भगवान विष्णु के चरणों को कलात्मक रूप से अंकित करें।
 
* फिर दिन की तेज धूप में विष्णु के चरणों को ढंक दें।
 
* देवउठनी एकादशी को रात्रि के समय सुभाषित स्त्रोत पाठ, भगवत कथा और पुराणादि का श्रवण और भजन आदि का गायन करें।
 
* घंटा, शंख, मृदंग, नगाड़े और वीणा बजाएं।
 
* विविध प्रकार के खेल-कूद, लीला और नाच आदि के साथ इस मंत्र का उच्चारण करते हुए भगवान को जगाएं : -
 
'उत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पतये।
त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत्‌ सुप्तं भवेदिदम्‌॥'
'उत्थिते चेष्टते सर्वमुत्तिष्ठोत्तिष्ठ माधव।
गतामेघा वियच्चैव निर्मलं निर्मलादिशः॥'
'शारदानि च पुष्पाणि गृहाण मम केशव।'
 
इसके बाद विधिवत पूजा करें।  
कैसे करें व्रत-पूजन :-
 
* पूजन के लिए भगवान का मन्दिर अथवा सिंहासन को विभिन्न प्रकार के लता पत्र, फल, पुष्प और वंदनबार आदि से सजाएं।
 
* आंगन में देवोत्थान का चित्र बनाएं, तत्पश्चात फल, पकवान, सिंघाड़े, गन्ने आदि चढ़ाकर ढंक दें तथा दीपक जलाएं।
 
* विष्णु पूजा या पंचदेव पूजा विधान अथवा रामार्चनचन्द्रिका आदि के अनुसार श्रद्धापूर्वक पूजन तथा दीपक, कपूर आदि से आरती करें।
 
* इसके बाद इस मंत्र से पुष्पांजलि अर्पित करें : -  
'यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तानि धर्माणि प्रथमान्यासन।
तेह नाकं महिमानः सचन्त यत्र पूर्वे साध्याः सन्तिदेवाः॥'
 
पश्चात इस मंत्र से प्रार्थना करें : -
 
'इयं तु द्वादशी देव प्रबोधाय विनिर्मिता।
त्वयैव सर्वलोकानां हितार्थ शेषशायिना॥'
इदं व्रतं मया देव कृतं प्रीत्यै तव प्रभो।
न्यूनं सम्पूर्णतां यातु त्वत्प्रसादाज्जनार्दन॥'  
साथ ही प्रह्लाद, नारद, पाराशर, पुण्डरीक, व्यास, अम्बरीष,शुक, शौनक और भीष्मादि भक्तों का स्मरण करके चरणामृत, पंचामृत व प्रसाद वितरित करें। तत्पश्चात एक रथ में भगवान को विराजमान कर स्वयं उसे खींचें तथा नगर, ग्राम या गलियों में भ्रमण कराएं।  
(शास्त्रानुसार जिस समय वामन भगवान तीन पद भूमि लेकर विदा हुए थे, उस समय दैत्यराज बलि ने वामनजी को रथ में विराजमान कर स्वयं उसे चलाया था। 
ऐसा करने से 'समुत्थिते ततो विष्णौ क्रियाः सर्वाः प्रवर्तयेत्‌' के अनुसार भगवान विष्णु योग निद्रा को त्याग कर सभी प्रकार की क्रिया करने में प्रवृत्त हो जाते हैं)। अंत में कथा श्रवण कर प्रसाद का वितरण करें।   

Legends state that the consort of Lord Vishnu, Goddess Lakshmi was unsatisfied with the way Lord Vishnu slept. Sometimes, he remained awakened for days and sometimes, he slept continuously for several days. Hence, Goddess Lakshmi visited Lord Vishnu and complained about his indiscipline followed. She also informed him that several lords, such as Lord Shiva, Lord Brahma, Devas and Saints, are forced to wait for many days in order to meet him. Hence, they returned disappointed without having Lord Vishnu's Darshan. Furthermore, this neutral situation of Lord Vishnu is highly taken advantage of by the demons. They make the most of this opportunity in causing pain to human beings, thereby leading to the spread of Adharma on earth. After patiently listening to Goddess Lakshmi, Lord Vishnu replied that he would soon come up with a solution. Meanwhile, the Devas and Saints visit Lord Vishnu and inform him about the robbery of the Vedas by a Demon named Sankhyayan. The demon had committed this act in order to deprive the human beings about the knowledge of the Vedas and spread Adharma all around. On hearing this, Lord Vishnu promised the sages that he would get back the Vedas. After fighting for several days with Demon Sankhyayan, he was successful in getting the Vedas back. He returned the Vedas to Goddess Lakshmi, Devas and Saints. Additionally, he insisted on continuing with a long sleep but only for four months. This sleep started from Ashadha Shuddha Ekadashi until Kartik Shuddha Ekadashi, which is also known as Prabodhini Ekadashi or Dev Uthani Ekadashi. Various pujas and prayers are carried on this day dedicated to Lord Vishnu. The important Pandarpur Yatra also takes place on this day in Lord Vitthal Temple. The most popular Tulsi Vivah Festival and Shaligram Puja rituals also commence on Prabodhini Ekadashi in some regions while in other communities, they take place on the day after Ekadashi. By observing the Prabodhini Ekadashi vrat, devotees believe that they would be able to get rid off their sins and attain salvation, or Moksha. At some places, devotees observe a complete fast, that is, they do not eat anything or even drink water on this day.
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